मां दंतेश्वरी की करुणा, मृत नवजात शिशु की लौटी धड़कन, दीप घुटना यात्रा कर मंदिर पहुंची मां कहा माता ने लौटाया मेरा बेटा…

संवाद एक्सप्रेस दंतेवाड़ा। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था का अद्भुत और चमत्कारिक उदाहरण सामने आया है। बस्तर जिले के करपावंड गांव की महिला नीलावती का नवजात बेटा जन्म लेते ही मृत हो गया था। चार घंटे तक उसने मां दंतेश्वरी की तस्वीर के सामने बैठकर करुणा भरी पुकार की और रो-रोकर मां से अपने बच्चे को वापस लौटाने की फरियाद करती रही। नीलावती ने देवी से विनती की – “मां, यदि मेरे बच्चे को जीवन मिल जाए तो मैं दीप घुटना यात्रा करते हुए आपके दरबार में हाजिरी दूँगी।”
डॉक्टरों ने खो दी थी उम्मीद, बच्चे की लौटी धड़कन..
जन्म के बाद नवजात को जब जगदलपुर मेडिकल कॉलेज, डिमरापाल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने साफ कहा कि बच्चे की कोई उम्मीद नहीं है। बच्चे का दिल धड़कना बंद हो चुका था। लेकिन मां की आस्था अडिग रही। उसने अपनी आँखों में आंसू लिए देवी से बार-बार प्रार्थना की।
चमत्कारिक रूप से लौटी नवजात बच्चे की सांसे लौटी
मां दंतेश्वरी की करुणा और आस्था की ताकत का परिणाम यह हुआ कि कुछ ही देर में मृत माने जा चुके बच्चे की धड़कनें लौटने लगीं। डॉक्टर भी हैरान रह गए। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच दंतेश्वरी माता के चमत्कार के रूप में चर्चा का विषय बन गई।
छह महीने बाद निभाया व्रत
अब, छह महीने बाद शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर नीलावती अपने स्वस्थ और सुरक्षित बच्चे को सपरिवार सहित लेकर दीपक हाथों में लेकर घुटने के बल यात्रा करते मां दंतेश्वरी के दरबार दंतेवाड़ा मंदिर पहुंची। उसने मां को धन्यवाद देते हुए अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। इस दौरान शिशु की मां लीलावती ने कहा कि माता दंतेश्वरी ने उनके बेटे का जीवन लौटाया है। हमेशा माई जी के प्रति मेरी कृतज्ञ रहूंगी।
बस्तर की आराध्य दंतेश्वरी माई है आस्था का प्रतीक
इस घटना को श्रद्धालु मां दंतेश्वरी की असीम करुणा और आस्था की शक्ति का जीता-जागता उदाहरण मान रहे हैं। भक्तों का कहना है कि जब मन से मां को पुकारा जाए, तो वे भक्तों की पुकार जरूर सुनती हैं। खासकर बस्तर में जब भी किसी पर संकट आता है तो वह सीधा माता दंतेश्वरी से कष्टों को दूर करने फरियाद करता है। और माई जी भी अपने ऊपर आशक्त भक्तों की जो भी कामना है उसे पूरा करती है।