
बीजापुर। नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां 103 माओवादियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इनमें 49 माओवादी ऐसे हैं जिन पर कुल 1 करोड़ 06 लाख 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वालों में एक डीव्हीसीएम, चार पीपीसीएम, चार एसीएम, पांच एरिया कमेटी सदस्य, पांच मिलिशिया कमांडर/डिप्टी कमांडर, चार जनताना सरकार अध्यक्ष, 22 जनताना सरकार सदस्य, 23 मिलिशिया प्लाटून सदस्य सहित विभिन्न पदों पर सक्रिय माओवादी शामिल हैं।
आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि संगठन की विचारधारा से मोहभंग, लगातार हो रही नेतृत्व की कमी, सुरक्षा बलों की दबावपूर्ण कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। आत्मसमर्पित माओवादियों को प्रोत्साहन स्वरूप 50-50 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया।
बीजापुर में उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, डीआईजी केरिपु सेक्टर बीएस नेगी, एसपी बीजापुर डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव, कोबरा और केरिपु बटालियनों के कमांडेंट, एसटीएफ और डीआरजी के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य पुलिस अधिकारीगण की उपस्थिति में हुआ।
नक्सल संगठन की कमजोर होती पकड़।
आंकड़ों के अनुसार 01 जनवरी 2025 से अब तक 421 माओवादी गिरफ्तार हुए, 410 ने आत्मसमर्पण किया और 137 मारे गए। वहीं, 01 जनवरी 2024 से अब तक 924 गिरफ्तारियां, 599 आत्मसमर्पण और 195 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए। यह साबित करता है कि नक्सलियों का जनाधार लगातार सिमट रहा है।
सुरक्षा कैम्प और विकास योजनाओं का असर।
ग्रामीण इलाकों में नए सुरक्षा कैम्प की स्थापना, सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी सुविधाओं का विस्तार तथा आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के प्रचार-प्रसार से माओवादियों का संगठन से मोहभंग तेजी से बढ़ा है। आज का यह आत्मसमर्पण न केवल हिंसा छोड़ने का संकेत है, बल्कि उस विचारधारा की हार है जो दशकों तक भ्रम और आतंक के सहारे ग्रामीणों को गुमराह करती रही।