नक्सल संगठन में मतभेद, शांति वार्ता को लेकर गढ़चिरौली एवं उत्तर बस्तर डिवीजन ने भी किया समर्थन।
माओवादियों की तेलंगाना राज्य समिति द्वारा शांति वार्ता को बताया था निजी राय।

नक्सली अभय उर्फ सोनू ने प्रेस नोट एवं ऑडियो संदेश देकर किया था शांति वार्ता का समर्थन।
जगदलपुर। नक्सलियों के भीतर अब खुला मतभेद सामने आने लगा है। हाल ही में नक्सली कमांडर अभय उर्फ सोनू द्वारा सरकार के सामने हथियार डालने की बात कही गई थी, जिसके बाद नक्सलियों में दो खेमे बंटते दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नक्सलियों के उत्तर बस्तर डिविज़नल कमेटी और गढ़चिरौली डिवीजन ने सोनू के बयान का समर्थन किया है। इन दोनों डिवीज़नों का पत्र सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, सोनू के बयान के बाद नक्सलियो की तेलंगाना राज्य समिति द्वारा प्रेस नोट जारी कर न केवल सोनू को हथियार छोड़ने की सलाह दी थी बल्कि उसके बयान की निंदा भी की थी। इससे साफ हो गया है कि नक्सली संगठन के भीतर गंभीर मतभेद और दो फाड़ की स्थिति बन चुकी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह दरार नक्सल आंदोलन की कमज़ोर होती पकड़ का संकेत है और आने वाले समय में आत्मसमर्पण में और इज़ाफा हो सकता है।

गढ़चिरौली डिवीजन की ओर से 27 सितंबर को जारी पर्चे में भी सोनू के बयान का अनुमोदन किया गया। प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि पार्टी की मौजूदा परिस्थितियां बेहद कमजोर हैं और लगातार आंतरिक कलह तथा जनता के बीच कमज़ोर होते जनाधार ने संगठन को हाशिए पर ला खड़ा किया है। लिहाज़ा, मौजूदा हालात में हथियार छोड़कर सामाजिक और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना ही उचित होगा।

वहीं उत्तर बस्तर डिवीजनल कमेटी की ओर से 28 सितंबर को जारी पर्चे में साफ लिखा गया है कि दशकों से चले आ रहे सशस्त्र आंदोलन से पार्टी को अब अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मारे गए है, लेकिन जनाधार लगातार कम होता गया। ऐसे हालात में अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही सही रास्ता है। कमेटी ने सोनू के बयान को उचित बताते हुए उसका समर्थन किया है।