1991 में जेल ब्रेक में शामिल कुख्यात नक्सली मांडा रूबेन ने चार दशक बाद डाले हथियार, वारंगल पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण।

जगदलपुर। दक्षिण बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय और कई नक्सली वारदातों में शामिल कुख्यात माओवादी मांडा रूबेन उर्फ कन्नन्ना उर्फ मंगन्ना उर्फ सुरेश (67 वर्ष) ने मंगलवार को वारंगल पुलिस आयुक्त के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
तेलंगाना पुलिस के मुताबिक रूबेन संगठन के दक्षिण बस्तर डिविजन कमेटी सचिव और डीकेएसजेडसी (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का सदस्य था। पुलिस ने बताया कि रूबेन ने करीब 44 साल तक नक्सली संगठन में रहकर हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया और पुलिस बलों व निर्दोष नागरिकों की हत्या की कई घटनाओं में शामिल रहा।
हिंसक घटनाओं में शामिल रहा था रूबेन
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मांडा रूबेन ने 1980 के दशक से लेकर 2000 तक कई नक्सली हमलों की योजना बनाई और उनमें भाग लिया जिनमें प्रमुख रूप से गोल्लापल्ली–मराईगुड़ा घात (1988) : 20 जवानों की हत्या और हथियार लूटे गए। येटिगट्टू घात (1988) : 8 जिला पुलिसकर्मी शहीद हुए। तारलगुड़ा थाना हमला (1990) : पुलिस बल पर सशस्त्र हमला किया गया। रूबेन 1991 में छत्तीसगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़ा, लेकिन बाद में जगदलपुर जेल तोड़कर फरार हो गया। यह घटना “जगदलपुर जेल ब्रेक” के नाम से जानी जाती है।
कोंटा और अबूझमाड़ क्षेत्रों में फैलाया आतंक।
फरारी के बाद वह फिर से कुंटा, केशकाल और अबूझमाड़ क्षेत्रों में सक्रिय हुआ और स्थानीय कमेटियों का हिस्सा बना। उसने संगठन की ओर से गांवों में दहशत फैलाने, पुलिस पर हमले की तैयारी और युवाओं को बहकाने जैसे काम किए।बाद में स्वास्थ्य खराब होने पर उसने सक्रिय नक्सली गतिविधियां छोड़ दीं, लेकिन संगठन को रसद और ठिकाना उपलब्ध कराता रहा।
अब हथियार डालने को मजबूर।
सरकार और पुलिस द्वारा चलाई जा रही आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति तथा लगातार चल रहे सर्च अभियान के दबाव में रूबेन ने आखिरकार आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।
पुलिस के अनुसार, उस पर किसी घोषित इनाम का उल्लेख नहीं है, लेकिन वह लंबे समय से दक्षिण बस्तर क्षेत्र का वांछित माओवादी था।
पुलिस की अपील – “अब हिंसा छोड़ें, समाज की मुख्यधारा में लौटें” वारंगल पुलिस आयुक्त ने कहा “जंगलों में छिपे बाकी नक्सली भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें। सरकार आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास योजना के तहत सभी आवश्यक सुविधाएं देगी।” पुलिस ने कहा कि अब युवाओं में माओवादी विचारधारा के प्रति कोई आकर्षण नहीं बचा है और नक्सलवाद आज पूरी तरह अप्रासंगिक व असफल विचारधारा बन चुका है।