गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने 61 माओवादियों का आत्मसमर्पण, पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू दादा ने सीएम को सौंपी एके 47।

जगदलपुर। महाराष्ट्र के गडचिरोली में आज नक्सल मोर्चे पर एक ऐतिहासिक दिन दर्ज हुआ। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में कुल 61 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें माओवादी संगठन के शीर्ष नेता पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू दादा भूपति भी शामिल हैं, जिन पर करोड़ों रुपये का इनाम घोषित था। इन माओवादियों ने अपने साथ 50 से अधिक हथियार, जिनमें ऑटोमैटिक राइफलें, INSAS और एएके-47 शामिल हैं, पुलिस के सुपुर्द किए। यह आत्मसमर्पण महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देशभर में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर ऑपरेशन माना जा रहा है।
देश के सबसे बड़े माओवादी नेता ने डाले हथियार।
सोनू भूपति, जो माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति के वरिष्ठ सदस्य और पोलित ब्यूरो स्तर के नेता हैं, ने बुधवार को 25 किलोमीटर जंगल पार कर अपने साथियों के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने अपने साथ 1 पोलित ब्यूरो सदस्य, 2 DKSZCM सदस्य, 10 DVCM (डिवीजनल कमेटी मेंबर) और अन्य सक्रिय नक्सली सदस्यों को लेकर हथियार डाले। यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम गडचिरोली पुलिस मुख्यालय में आयोजित किया गया, जहां राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी, गृह विभाग के वरिष्ठ सदस्य और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद रहे।

फडणवीस बोले — “संवाद और पुनर्वास से खत्म होगी हिंसा”
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की दिशा में निर्णायक कदम है। हमारी सरकार ने संवाद और पुनर्वास की नीति को आगे बढ़ाया है, ताकि वर्षों से हिंसा में फंसे लोग अब मुख्यधारा में लौट सकें।” उन्होंने गडचिरोली पुलिस और सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि यह समर्पण पूरे देश में नक्सल अभियान की सबसे बड़ी सफलता
नया अध्याय — शांति और विकास की दिशा में गडचिरोली
देश में चलाए जा रहे नक्सल अभियान के तहत अब तक का सबसे बड़ाआत्मसमर्पण है। इस ऐतिहासिक समर्पण के बाद गडचिरोली पुलिस ने कहा कि क्षेत्र में अब नक्सल गतिविधियां तेजी से कमजोर होंगी। प्रशासन ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेज तैयार किया है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।