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छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन का ऐतिहासिक दिन: नक्सली लीडर रूपेश ने साथियों से की अपील — “पहले बचना जरूरी, जो लौटना चाहें संपर्क करे, नक्सली नेता ने सुनिए क्या कहा…

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने 170 से अधिक नक्सली करेंगे आत्मसमर्पण, 100 से ज्यादा हथियार होंगे जमा

 

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में शुक्रवार, 17 अक्टूबर को इतिहास रचने जा रहा है। राज्य के जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रम में 140 से अधिक नक्सली अपने हथियार डालकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। इन नक्सलियों के साथ करीब 100 से अधिक हथियार भी प्रशासन को सौंपे जाएंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस आत्मसमर्पण प्रक्रिया का नेतृत्व उत्तर पश्चिम सब जोनल प्रभारी रूपेश उर्फ तक्कलापल्ली वशुदेव राव (उर्फ सतीश) कर रहे हैं, जो लंबे समय तक नक्सल संगठन के प्रवक्ता और रणनीतिकार रहे हैं। बताया जा रहा है कि सभी नक्सली भैरमगढ़ क्षेत्र से कूच कर जगदलपुर पहुंच रहे हैं, जहां पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

 

पहले खुद को बचाना जरूरी” — नक्सली प्रवक्ता रूपेश का संदेश

 

आत्मसमर्पण से पहले रूपेश उर्फ सतीश ने अपने साथियों के नाम एक भावनात्मक संदेश जारी किया है। संदेश में उन्होंने कहा,  “हमने यह निर्णय कठिन परिस्थितियों में लिया है। हमारे कुछ साथी अब भी संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि आज सबसे पहले हमें अपनी सुरक्षा के बारे में सोचना होगा। पहले खुद को बचाना जरूरी है, उसके बाद ही आगे की दिशा तय की जा सकती है।” रूपेश ने अपने संदेश में कहा कि अब समय आ गया है जब हिंसा के रास्ते से हटकर समाज की मुख्यधारा में लौटने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कई साथी इस प्रक्रिया से अब तक अनजान हैं, इसलिए वे आगे आने में हिचकिचा रहे हैं।

नक्सलियों के लिए जारी किया मोबाइल नंबर

रूपेश ने अपने संदेश में उन नक्सलियों से भी संपर्क करने की अपील की है जो अभी जंगलों में सक्रिय हैं या अन्य राज्यों में हैं। उन्होंने कहा “जो साथी आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं या अपने विचार साझा करना चाहते हैं, वे मुझसे संपर्क करें।” इसके साथ ही रूपेश ने अपना मोबाइल नंबर 6267138163 सार्वजनिक रूप से जारी किया, ताकि इच्छुक नक्सली सीधे संपर्क कर सकें और आत्मसमर्पण प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

कांकेर में भी 50 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण।

इससे पहले कांकेर जिले के कामतेड़ा बीएसएफ कैंप में स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य भास्कर मंडावी के नेतृत्व में 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें कई वांछित और इनामी नक्सली भी शामिल थे। सभी ने सरकार की पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया था।

रेड कार्पेट बिछाकर करेंगे स्वागत” — उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सल समस्या के समाधान में यह आत्मसमर्पण ऐतिहासिक कदम साबित होगा। “हम उन सभी साथियों का स्वागत करेंगे जो हिंसा छोड़कर समाज में वापस लौटना चाहते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने रूपेश और उसके साथियों का आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ में शांति की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार ऐसे सभी साथियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेगी।”

 

सरकार की सख्त रणनीति का असर।

राज्य सरकार की सख्त नीतियों, सुरक्षा अभियानों और पुनर्वास योजनाओं का असर अब स्पष्ट रूप से दिख रहा है। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का मजबूत नेटवर्क था, वहां अब लगातार सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा रहे हैं और विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल लीडर रूपेश का यह संदेश संगठन के भीतर मनोवैज्ञानिक परिवर्तन का संकेत है और आने वाले समय में बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना को और मजबूत करता है।