छत्तीसगढ़ में 208 नक्सलियों ने डाले हथियार — माओवादी नेता रूपेश के आत्मसमर्पण से हिला नक्सल मोर्चा, नक्सल मुक्त होने की ओर अबूझमाड़ ।

जगदलपुर धीरेन्द्र तिवारी।
ऐतिहासिक आत्मसमर्पण — उत्तर बस्तर में लाल आतंक पर निर्णायक प्रहार
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली। उत्तर बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र में 208 माओवादी कैडरों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इनमें 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों ने 153 हथियारों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इस ऐतिहासिक पहल का नेतृत्व किया है माओवादी संगठन दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के वरिष्ठ नेता रूपेश उर्फ सतीश उर्फ आसन्ना ने जो अब संगठन से अलग होकर शांति और विकास की राह पर लौट आए हैं।
रूपेश की वापसी – बंदूक छोड़ शांति का संदेश
कभी माओवादी संगठन का प्रवक्ता और दक्षिण बस्तर में सक्रिय प्रमुख चेहरा रहे रूपेश ने अब हथियार छोड़कर शांति का मार्ग चुना है।
आत्मसमर्पण के दौरान रूपेश ने कहा —
“अब लड़ाई नहीं, जिंदगी चाहिए। पहले खुद को और अपने परिवार को बचाना जरूरी है। जो साथी लौटना चाहते हैं, वे आएं — अब जंगल नहीं, समाज हमें पुकार रहा है।”
रूपेश के इस संदेश के बाद ही सैकड़ों माओवादी कार्यकर्ताओं ने हथियार डालने का निर्णय लिया।
153 हथियार किए गए जमा, लाल आतंक का ढांचा ढहा
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने जो हथियार सौंपे हैं, उनमें शामिल हैं —
- 19 AK-47 रायफलें
- 1 INSAS LMG
- 23 INSAS रायफलें
- 17 SLR रायफलें
- 4 कार्बाइन
- 36 .303 रायफलें
- 11 BGL लांचर
- 41 सिंगल शॉट गन
- 1 पिस्टल
इन हथियारों के साथ अबूझमाड़ के अंदरूनी नक्सल ठिकानों का नक्शा और संगठन की संरचना की जानकारी भी पुलिस को सौंपी गई है।

रूपेश का सफर – जंगल से समाज की ओर
रूपेश वर्षों से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के समन्वयक के रूप में सक्रिय था। वह कई नक्सली कार्रवाइयों का योजनाकार रहा, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसने संगठन की दिशा और अंदरूनी हिंसा पर सवाल उठाए।
उसने आत्मसमर्पण के समय कहा
?️ “हम जिनके लिए लड़ रहे थे, वही अब हमारे खिलाफ खड़े हो गए हैं। समाज से कटकर जंगलों में रहना अब कोई समाधान नहीं है।”
समाज ने अपनाया – ‘लाल बंदूक से लाल गुलाब तक’ की यात्रा
आत्मसमर्पण के बाद मांझी-चालकी समाज ने सभी 208 नक्सलियों का समाज में स्वागत किया।
समाज के मुखियाओं ने आत्मसमर्पित नक्सलियों का स्वागत गुलाब देकर राज्य सरकार ने घोषणा की है कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत रोजगार, आवास और आर्थिक सहायता दी जाएगी।

संगठन को बड़ा झटका – वरिष्ठ माओवादी भी हुए सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वालों में —
- 1 CCM स्तर का कैडर
- 4 DKSZC कैडर
- 1 रीजनल कमेटी मेंबर
- 21 DVCM, 61 ACM, 98 पार्टी मेंबर, और 22 PLGA/RPC सदस्य शामिल हैं।
इनमें माओवादी संगठन के वरिष्ठ चेहरे रूपेश, रनिता, भास्कर, राजू सलाम, रतन, मीना और प्रसाद जैसे नाम भी शामिल हैं।
अबूझमाड़ नक्सल मुक्त – अब दक्षिण बस्तर अगला मोर्चा
सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि अबूझमाड़ से नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद उत्तर बस्तर लगभग नक्सल मुक्त हो गया है। अब अभियान का फोकस दक्षिण बस्तर पर होगा, जहां नक्सल संगठन के कुछ बचे हुए गुट सक्रिय हैं।
? “यह छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में ऐतिहासिक मील का पत्थर है।” — डीजीपी
लाल आतंक से विकास की ओर कदम
रूपेश और उसके साथियों का आत्मसमर्पण न सिर्फ हथियार डालने की घटना है, बल्कि विचारों के परिवर्तन की मिसाल है।दशकों से नक्सलवाद की आग में झुलसता बस्तर अब नई सुबह की ओर बढ़ रहा है। जहां बंदूक की जगह कृषि, शिक्षा और विकास की आवाजें गूंजेंगी।