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चार सूत्रीय मांगों को लेकर दंतेवाड़ा में सहकारिता कर्मचारियों का आंदोलन तेज, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, धान खरीदी बहिष्कार की चेतावनी।

 

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ प्रांतीय पंचायत छ.ग. राज्य सहकारिता मूल्य आधारित कर्मचारी संघ के आह्वान पर दंतेवाड़ा जिले में सहकारिता कर्मचारियों ने चार सूत्रीय मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आगामी धान खरीदी सीजन 2025-26 का बहिष्कार किया जाएगा और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होगा। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि वे लंबे समय से शासन से न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन लगातार उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। आंदोलन में जिले की सभी सहकारी समितियों के कर्मचारी शामिल हुए। ज्ञापन में कहा गया कि 2058 सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की सेवा कर रहे लगभग 15 हजार कर्मचारियों को आज तक स्थायीकरण, वेतनमान और सेवा नियमों का लाभ नहीं मिला है।

संघ की प्रमुख चार मांगें:

1. समर्थन मूल्य धान खरीदी वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में परिवहन भाड़ा सहित संपूर्ण भुगतान शीघ्र किया जाए।

2. श्री कांकड़े समिति रिपोर्ट 2018 के अनुसार सेवा नियम संशोधन, महंगाई भत्ता, भविष्य निधि, और एसआईसी लाभ तत्काल लागू किए जाएं।

3. धान खरीदी नीति 2025-26 में आउटसोर्सिंग प्रणाली को समाप्त किया जाए, और कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति सीधे सहकारी समितियों के माध्यम से की जाए।

4. सहकारी समितियों में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की जाए, और मौजूदा कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।

आंदोलन की आगामी रूपरेखा:

24 अक्टूबर 2025: जिले में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

28 अक्टूबर 2025: रायपुर में प्रदेश स्तरीय विशाल रैली आयोजित की जाएगी।

1 नवंबर 2025 से: प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कलमबंद आंदोलन शुरू होगा।

12 नवंबर 2025 से: शासन द्वारा निर्णय न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

जिला सहकारिता संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि शासन द्वारा उनकी समस्याओं पर बार-बार पत्राचार और ज्ञापन दिए जाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस बार भी मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो धान खरीदी कार्य पूरी तरह प्रभावित होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।कर्मचारियों ने किसानों से भी अपील की कि वे इस आंदोलन को समझें और सहकारिता कर्मचारियों का समर्थन करें, क्योंकि यह आंदोलन किसानों के हितों और सहकारी व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा है।