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झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड श्याम उर्फ चैतु दादा ने किया आत्मसमर्पण, बस्तर पुलिस के सामने 10 नक्सली मुख्यधारा में लौटे।

जगदलपुर। बस्तर में कई दशक से  सुरक्षा बलों और नेताओं की हत्या की साजिशों को अंजाम देने वाला खूंखार नक्सली श्याम उर्फ चैतु दादा आखिरकार हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट आया। चैतु दादा वही नक्सली है जिस पर 2013 के बहुचर्चित झीरमघाटी हमले का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 30 लोगों की मौत हुई थी। आज बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज और समाज प्रमुखों की उपस्थिति में चैतु दादा ने आत्मसमर्पण किया। उसके साथ 10 अन्य नक्सलियों ने भी समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।

दरभा डिवीजन का था मुख्य इंचार्ज।

चैतु दादा लंबे समय से नक्सल संगठन के दरभा डिवीजन का प्रमुख इंचार्ज था। इसी डिवीजन के दस्ते ने 2013 में झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला किया था। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी तलाश वर्षों से थी।

आत्मसमर्पण कार्यक्रम में अधिकारी एवं समाज प्रमुख रहे उपस्थित।

समर्पण कार्यक्रम के दौरान बस्तर रेंज आईजी पी. सुंदरराज, डीआईजी कमलोचन कश्यप, बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा, दंतेवाड़ा एसपी गौरव रॉय, तथा समाज के प्रमुखजन मौजूद रहे। पूर्व में आत्मसमर्पित नक्सली रूपेश भी कार्यक्रम में शामिल हुआ।

संविधान की प्रति देकर किया गया स्वागत।

समर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को पुलिस अधिकारियों और समाज प्रतिनिधियों ने भारतीय संविधान की प्रति भेंट कर स्वागत किया। अधिकारियों ने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी नक्सलियों को सुरक्षा और जरूरी सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यधारा में लौटने का बड़ा संदेश।

चैतु दादा जैसे बड़े नक्सली कैडर का सरेंडर बस्तर क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इससे नक्सल संगठन को गहरा मनोवैज्ञानिक झटका लगा है, वहीं क्षेत्र में शांति स्थापना और विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। बस्तर पुलिस ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में और भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।