झीरम घाटी कांड में बड़ा फैसला, सभी 10 आरोपी दोषी करार।

13 साल बाद आया अदालत का फैसला, 16 सितंबर को सुनाई जाएगी सजा।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जगदलपुर स्थित विशेष एनआईए अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोषियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने यह फैसला सुनाया। दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान सुकमा से जगदलपुर लौट रहे कांग्रेस नेताओं के काफिले पर दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेन्द्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई कांग्रेस नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी।
इस मामले में कुल 11 नक्सलियों के खिलाफ मुकदमा चला, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी रही।
मामले की जांच के लिए वर्ष 2013 में जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया गया था। इसके बाद वर्ष 2018 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों की अंतिम बहस 10 अगस्त को पूरी हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पहले 31 अगस्त को फैसला आने की संभावना थी, लेकिन बाद में निर्णय की तारीख बढ़ाकर 5 सितंबर कर दी गई। शुक्रवार को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए अब 16 सितंबर को सजा सुनाने की तारीख तय की है।
झीरम घाटी मामले में दोषी करार दिए गए 10 आरोपी
प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम उर्फ अयाता माड़कम, मुक्का मंडावी, मड़कामि देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग, सुमित्र जिन पर उक्त वारदात को अंजाम देने के आरोप थे। अब ये सभी दोषी करार दिए गए है।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में से एक माना जाता है। इस हमले में कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद प्रदेश की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ा था।