सतीश अल्लुर बीजापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में कुछ महीने ही बचे है। राज्य में प्रमुख पार्टियों में चुनाव लड़ने के लिए हर विधानसभा में अनेक दावेदार अपनी दावेदारी कर रहे हैं और पार्टियों भी ऐसे ही व्यक्ति को टिकट देना चाहती है जो विधानसभा में जीत अर्जित कर सके। टिकट की यह दावेदार राजनीतिक क्षेत्र एवं प्रशासनिक क्षेत्र से भी बनाए जा सकते हैं। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल देखने को मिल रहा है। राजनीतिक पार्टियों में से चुनाव लड़ने के लिए कई ऐसे दावेदार जो प्रशासनिक क्षेत्र में वर्षों से सेवा कर रहे हैं वह भी इन पार्टियों में अपनी दावेदारी कर रहे हैं। इनमें से एक बीजापुर विधानसभा के लिए भारतीय जनता पार्टी में पेशे से डॉक्टर बी पुजारी का नाम प्रबल दावेदारों में से माना जा रहा है डॉक्टर पुजारी ने राज्य सरकार को वर्ष भी दिया हुआ है लेकिन विभाग ने उन्हें डिमोशन में अब भेज दिया है।
दरअसल कुछ महीनों से बीजेपी के विधायक प्रत्याशी के लिए डॉ बी आर पुजारी का नाम जोरो से चर्चा में चल रहा है। डॉ पुजारी वर्तमान में संयुक्त संचालक लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बस्तर संभाग के पद पर पदस्थ थे और सर्वे में उनका नाम आने पर उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन दिया था। हालांकि उनका आवेदन अब तक स्वीकार नहीं किया गया है लेकिन 6 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की और से एक आदेश निकाला गया है जिसमें उन्हें बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक के पद से डिमोशन कर उन्हें शासकीय जिला चिकित्सालय जगदलपुर में नवीन पदस्थापना दी गई है। डॉ पुजारी के डिमोशन का यह आदेश सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस संबध में जब डॉक्टर बीआर पुजारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से मेरा नाम बीजेपी से संभावित उम्मीदवारों की सूची में आ रहा था मैंने अपने से चुनाव लड़ने की कोई बात नहीं रखी थी पर सर्वे में मेरा नाम आने के बाद मैं वीआरएस के लिए आवेदन दिया है पर उसे अटका दिया गया है। वीआरएस लेना मेरा अधिकार है और चुनाव लड़ना भी संवैधानिक मौलिक अधिकार है जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। सर्वे में मेरा नाम आने से लोगो की हालत ख़राब हो रही है अभी टिकट किसे मिलेगा यह भी नहीं पता? मेरा जो डिमोशन किया गया है वह राजनीति से प्रेरित है। मैंने 23 वर्ष लोगो की सेवा की है लगभग 20 वर्ष मैंने बीजापुर में बिताया। मुझे बुलाकर ऐसे ही बोल देते तो मैं अपना भी वीआरएस आवेदन वापस ले लेता चुनाव भी नहीं लड़ता लेकिन जिस तरह से मेरा डिमोशन किया गया है इससे यह सिद्ध हो गया है की मुझे अगर टिकट मिलता है तो सामने वालों को काफ़ी दिक्क़त चुनाव में हो सकता है।
