“जहां चाह वहाँ राह” भोजनालय चलाकर महिलाएं हों रही आत्म निर्भर, हजारों की आमदनी कर रही अर्जित।

“गणराज स्व सहायता समुह‘‘ ने लजीज खाना बनाकर तलाशी रोजगार की राह।
संवाद एक्सप्रेस दंतेवाड़ा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘विहान‘‘ योजना ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने एवं आत्मनिर्भर बनाने में एक महती भूमिका अदा कर रहा है, वर्तमान में इसकी बदौलत गांव-गांव में ठेठ ग्रामीण महिलाएं आज घर की चारदीवारी से निकलकर आत्मनिर्भरता की डगर पर कदम दर कदम बढ़ा रही है और तो और उनका दखल उन कार्यक्षेत्रों में भी बढ़ा है, जिनमें पहले कभी पुरूषों का वर्चस्व दिखता था। इस क्रम में अन्य व्यवसायों की तुलना में भोजनालय व्यवसाय महिलाओं का सर्वाधिक रुचि कर व्यवसाय रहा है। प्रस्तुत वृतांत जिला दंतेवाड़ा के सबसे सुदूर विकासखंड कटेकल्याण के जनपद कार्यालय में स्थित भोजनालय के संबंध में है जहां ‘‘गणराज स्व सहायता समुह‘‘ की महिलाएं सफलतापूर्वक भोजनालय का संचालन कर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का कार्य कर रही है।

जिला मुख्यालय से करीब 45 से 50 किलोमीटर की दूरी पर वनांचल में स्थित इस विकासखंड का बाजार क्षेत्र अन्य विकासखंडों के समान विकसित नहीं है। स्थानीय लोगों के आवश्यकता अनुरूप ही यहां छोटे-छोटे दुकान और एक दो कामचलाऊ खाने-पीने और चाय इत्यादि मिलने के स्थान ही यहां के बाजार स्थल को इंगित करते है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘विहान‘‘ योजना के माध्यम से यहां की महिलाओं को भोजनालय व्यवसाय प्रारंभ करने में उम्मीद की किरण नजर आई। जिला मिशन प्रबंधन इकाई विहान की नेतृत्व में एवं तत्कालीन सीईओ जनपद व बीपीएम के सहयोग से गणराज स्व सहायता समूह की दीदियों ने जनपद कार्यालय में ही आज से डेढ़ वर्ष पूर्व होटल के साथ ही भोजनालय की शुरुआत की। प्रारंभ के कुछ एक महीने में कम सामग्रियों का विक्रय हुआ। लेकिन समुह ने निराश न होते हुए धैर्य पूर्वक होटलों में पसंद किए जाने वाले अनेक खाद्य सामग्रियों को भी अपने मैन्यु में जोड़ा और आज यहां चाय समोसा भजिया पोहा इत्यादि जैसे पारंपरिक नाश्ते तो मिलते ही हैं।

साथ ही समूह की महिलाओं ने एक कदम आगे बढ़कर सम्पूर्ण भोजन भी ग्राहकों को उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। और वर्तमान में यहां शुद्ध देसी जायके में बनी दाल चावल व सब्जी की थाली के अलावा पनीर, अंडा, मछली, वह चिकन की थाली भी परोसी जा रही है। और यह खाने के शौकीन ग्राहकों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। और तो और सभी लजीज खाने का रेट बाजार मूल्य से बहुत कम है। जहां अन्य होटलों में पनीर, मछली, चिकन की थालियों का मूल्य 200 रूपये के लगभग है। वहीं इस भोजनालय में समूह की दीदीयां बहुत ही वाजिब और सस्ते दर में खाना परोसती है जैसे ग्राहकों को यहां पनीर दाल चावल 70 रूपये, मछली टू पीस और चावल 100 रूपये, एवं चिकन चावल 120 रूपये में मिल जाती है। इस प्रकार जनपद कार्यालय के लगभग सभी स्टाफ के अलावा बाहर के भी लोग बड़े चाव के साथ दीदीयों के कैंटीन पर खाना खाने का लुत्फ उठाते हैं। अगर आमदनी का जिक्र किया जाए तो आज भोजनालय के माध्यम से स्व सहायता समूह की दीदीयां प्रति दिवस 8 से 10 हजार तक का विक्रय कर लेती हैं। और प्रत्येक दीदीयां को 12 से 15 हजार रुपये महिना की आय हो रही है और इस प्रकार समुह कों 50 से 60 हजार रूपये की अच्छी आमदनी मिल रही है। इस प्रकार ‘‘गणराज स्व सहायता समुह‘‘ की दीदियों ने ‘‘जहां चाह वहां राह‘‘ की उक्ति को सार्थक सिद्ध किया है। ये वही महिलाएं है जो खेती और घर-गृहस्थी के कामों में उलझी रहती थी, परन्तु आज सफल पुर्वक भोजनालय का संचालन कर रही है।