भर्ती में गोलमाल, चहेते को भर्ती करने प्रशासन ने किया खेला।

न्यायालय के आदेश को दिखाया ठेंगा, पहला इंटरव्यू निरस्त कर दूसरा किया आयोजित।
दंतेवाड़ा। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद प्रशासन के बेलगाम होने का खामियाजा बेरोजगार भुगत रहे हैं. ताज़ा मामला जिला मिशन समन्वयक में भर्ती का है.आपको बता दें कि इस पद के लिए पहला इंटरव्यू 14 नवम्बर 2024 को हो चुका था और उसमें मेरिट और अनुभव के आधार पर दुर्गा मंडल का प्रथम स्थान भी था. लेकिन यह कुछ लोगों को रास नहीं आया और फिर चालू हो गया प्रशासनिक खेला.अपने चहेते को भर्ती करने प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश को भी नहीं माना और पहले किये गए इंटरव्यू को सदस्यों की कम संख्या हवाला देते दूसरा इंटरव्यू 20 दिसंबर को लिया गया. जब कि पहले इंटरव्यू में पांच सदस्यों में चार मौजूद थे और इंटरव्यू के दौरान पांचवे सदस्य भी आ गए थे ऐसे में कम सदस्य संख्या का यह नौटंकी आसानी से समझा जा सकता है.दूसरी गौर करने वाली बात यह थी कि पीड़िता दुर्गा मंडल ने दूसरी बार हो रहे इंटरव्यू के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे आर्डर भी लेकर उसे जिला कलेक्टर, डीपीओ, सीईओ को आवेदन भी किया था इसके बावजूद भी इंटरव्यू लिया गया.

इसके साथ ही अब शुरू हुआ दूसरा खेला और दूसरे इंटरव्यू में पीड़िता को जानबूझकर खराब कम्प्यूटर दिया गया और कौशल परीक्षा के दौरान केवल उसी का फोटो ही खींचना, दाल को काला तो बना ही दिया.इसके साथ यह भी हैरत करने वाली बात थी कि पूर्व में जिन सदस्यों ने इंटरव्यू लिया था वे सभी नदारद थे और इस इंटरव्यू में सदस्य नए थे. जाहिर बात है कि अपने पसंदीदा का चयन करने सारा मामला सेट किया जा रहा था. यहां यह बताना जरुरी है जब पहले ही इंटरव्यू हो चुका था तो फिर दोबारा इंटरव्यू क्यों आयोजित की गई? कुल मिलाकर अब जिले में यह स्थिति है कि सरकार और प्रशासन जैसा चाहेंगे वैसा होगा. न तो पीड़ितों की सुनी जाएगी न ही कोर्ट की बात मानी जाएगी. अंधेर नगरी चौपट राजा की कहावत चरितार्थ होती दिखती है.