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माड़ में आईटीबीपी के बढ़ते कदम, पदमकोट में नया कैंप स्थापित।

 

नारायणपुर। अबूझमाड़ के घने जंगलों में नक्सल उन्मूलन की दिशा में आईटीबीपी (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सामरिक क्षेत्रीय मुख्यालय भुवनेश्वर के अधीन कोंडागांव नियंत्रणाधीन सभी वाहिनियां इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रही हैं। इस प्रयास के तहत 41वीं वाहिनी, आईटीबीपी ने बेडमाकोटी से लगभग 5 किमी आगे पदमकोट में नया कैंप स्थापित किया है।

विकास, विश्वास और सुरक्षा की नई पहल।
अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन आईटीबीपी की बढ़ती गतिविधियों से अब सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हो रही है। पदमकोट कैंप की स्थापना से न केवल स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है, बल्कि नक्सली गतिविधियों पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है। इस अभियान का नेतृत्व डी.आई.जी. राणा युद्धवीर सिंह कर रहे हैं, जो कठिन परिस्थितियों में जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “पदमकोट कैंप में सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय जनता के लिए चिकित्सा और अन्य जनकल्याणकारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।”

उन्होंने इस अभियान में सेंट्रल फ्रंटियर मुख्यालय के आई.जी. ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन की सराहना की और 41वीं वाहिनी के सेनानी नरेंद्र सिंह व उनकी टीम को कम समय में सी.ओ.बी. (कंपनी ऑपरेटिंग बेस) पदमकोट खोलने के लिए बधाई दी।

सुरक्षा बलों का संयुक्त प्रयास।
इस महत्वपूर्ण पहल में छत्तीसगढ़ पुलिस, डी.आर.जी. (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और अन्य सुरक्षाबलों ने भी अहम भूमिका निभाई है। इस अवसर पर श्री सुन्दरराज पी. (आई.जी., बस्तर रेंज), श्री अमित कामले (डी.आई.जी., कांकेर रेंज), श्री प्रभात कुमार (पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर), सेनानी अमित भाटी (53वीं वाहिनी) और सेनानी राजीव गुप्ता (45वीं वाहिनी) भी मौजूद रहे।