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इस वक्त की बड़ी खबर:- नक्सली संघर्ष विराम को तैयार, एक माह सीजफायर की मांग।

 

 

सरकार से वीडियो कॉल के माध्यम से वार्ता करने को तैयार।

 

रायपुर/जगदलपुर। नक्सल मोर्चे से बड़ा ऐलान : संघर्ष विराम और शांति वार्ता को लेकर माओवादियों का नया बयान, ईमेल जारी कर सुझाव देने जारी किया पत्र। नक्सलियो के केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय के द्वारा जारी किया गया पत्र हो रहा वायरल। पत्र के सच्चाई का पता करने की पुलिस द्वारा की जा रही कोशिश।

छत्तीसगढ़ समेत देशभर में सक्रिय माओवादी संगठनों ने हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी तौर पर त्यागने और शांति वार्ता की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया है। संगठन से जुड़े सीमित कैडर और नेतृत्वकारी साथियों ने केंद्र और राज्य सरकारों से संवाद प्रक्रिया शुरू करने की पहल की है

जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि संगठन फिलहाल एक माह तक के लिए ऑपरेशन रूपी सैन्य गतिविधियों को स्थगित रखने और सरकार से औपचारिक बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। बयान में यह भी उल्लेख है कि लंबे समय से चल रहे हिंसक संघर्ष की जगह संवाद और लोकतांत्रिक दायरे में समाधान खोजने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

संघर्ष विराम की घोषणा।

माओवादियों ने साफ किया है कि एक माह तक हमले और जवाबी कार्रवाइयाँ रोकी जाएंगी। जेलों में बंद साथियों के विचार सरकार तक पहुँचाने की अपील की गई है। ईमेल के माध्यम से भी अपने विचार साझा करने का आग्रह किया गया है।

मार्च 2025 में केंद्र सरकार और पार्टी के बीच हुई बातचीत के प्रयास का हवाला देते हुए कहा गया है कि तत्कालीन हालात में सीज़फायर का प्रस्ताव अस्वीकार हो गया था, जिसके बाद माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर हमले तेज किए। मगर अब परिस्थितियों और संगठन का आंतरिक समीक्षा के बाद अस्थायी संघर्षविराम का रास्ता चुना गया है।

 

शांति प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा।

बयान में कहा गया है कि यदि सरकार और राजनीतिक दल गंभीरता दिखाते हैं तो संगठन भारत की उपेक्षित जनता की समस्याओं को समाधान दिलाने के लिए शांति वार्ता की मेज़ पर आने को तैयार है। माओवादी नेताओं ने साफ किया है कि वे अपनी बात सीधे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शांति समितियों के समक्ष रखना चाहते हैं।

जानकारो के अनुसार यह माओवादियों की रणनीतिक पहल है, जो एक ओर सैन्य दबाव का परिणाम है तो दूसरी ओर संगठन की कमजोर होती पकड़ को भी दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें इस प्रस्ताव को लेकर किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।