
धीरेंद्र तिवारी संवाद एक्सप्रेस दंतेवाड़ा। नक्सल प्रभावित दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के लगभग 16–17 गांवों के ग्रामीणों ने कोत्तागुडेम–किरंदुल रेलवे लाइन परियोजना के सर्वेक्षण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि बड़े बचेली, मदाडी, चोलनार, बेनपाल, कुटरेम, मडकामीरास समेत कई प्रभावित गांवों में रेलवे लाइन के सर्वे की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, लेकिन शासन–प्रशासन द्वारा न तो ग्रामवासियों को कोई जानकारी दी गई और न ही ग्राम पंचायतों की ग्राम सभाओं से अनुमति ली गई।
पेसा एक्ट और पांचवीं अनुसूची का हवाला।
ग्रामीणों ने पेसा एक्ट 1996 और पांचवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि परियोजना की प्रक्रिया पूरी तरह नियम विरुद्ध है। छत्तीसगढ़ पेसा नियम 2022 के अनुसार ग्राम सभा ही संसाधनों के उपयोग और नियोजन पर अंतिम निर्णय लेने की अधिकृत है, जबकि अब तक किसी भी ग्राम सभा से अनुमति नहीं ली गई। ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने समता बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997) के फैसले में स्पष्ट किया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति के बिना कोई भी औद्योगिक, खनन या आधारभूत परियोजना लागू नहीं की जा सकती। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों और परंपराओं की अनदेखी कर जबरन सर्वे कार्य जारी रखा गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
सामुदायिक वनाधिकार पट्टा वितरण की मांग, कांग्रेस ने सर्वे पर रोक लगाने कहा।
कोत्तागुडेम–किरंदुल रेलवे लाइन परियोजना को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने प्रभावित ग्रामीणों को सामुदायिक वनाधिकार पट्टे दिए जाने की मांग उठाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक पट्टों का वितरण नहीं किया जाता, तब तक रेलवे लाइन के सर्वे कार्य पर रोक लगाई जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता छविंद्र कर्मा और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तूलिका कर्मा ने कहा कि पांचवीं अनुसूची और पेसा एक्ट के प्रावधानों के तहत ग्रामीणों को उनके पारंपरिक अधिकार दिए बिना किसी भी विकास या औद्योगिक परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाना नियमों का उल्लंघन है।नेताओं ने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से सामुदायिक वनाधिकार पट्टों की मांग कर रहे हैं। पट्टा वितरण से ही उन्हें अपने संसाधनों और वन भूमि पर वैधानिक अधिकार मिल पाएंगे। ऐसे में सरकार को पहले ग्राम सभाओं के माध्यम से पट्टों का वितरण करना चाहिए, तभी किसी भी प्रकार की परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।