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नक्सलवाद की जकड़न तोड़ेगा बस्तर, संस्कृति और स्वदेशी से बनेगी नई पहचान : अमित शाह

 

जगदलपुर। बस्तर दशहरा महोत्सव के भव्य मंच से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज साफ संदेश दिया कि बस्तर अब नक्सलवाद की जकड़न तोड़ेगा और अपनी संस्कृति, परंपरा और स्वदेशी भावना के दम पर नई पहचान बनाएगा।

माँ दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने कहा कि 75 दिन तक चलने वाला बस्तर दशहरा विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव है, जिसकी ऐतिहासिक परंपरा 14वीं शताब्दी से चली आ रही है। मुरिया दरबार की न्याय व्यवस्था, आदिवासी संस्कृति और रथ यात्रा ने पूरे बस्तर को एक सूत्र में बाँधा है।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान नक्सलवाद नहीं, बल्कि इसकी लोकसंस्कृति, ओलंपिक, खानपान, कला और वाद्ययंत्र हैं, जो आज पूरे विश्व में आकर्षण का केंद्र बने हैं।

स्वदेशी से भारत बनेगा विश्व शक्ति।

गृह मंत्री ने स्वदेशी अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर 140 करोड़ भारतीय स्वदेशी उत्पाद अपनाने का संकल्प लें, तो भारत को विश्व की सर्वोच्च आर्थिक ताकत बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने स्वदेशी मेलों, वॉकथॉन और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करते हुए कहा कि मोदी सरकार आदिवासी परंपराओं और स्वदेशी गौरव को सहेजने के लिए कटिबद्ध है।

नक्सलवाद – विकास की सबसे बड़ी बाधा

श्री शाह ने स्पष्ट कहा कि बस्तर पिछड़ा नहीं है, बल्कि नक्सलवाद ने इसे पीछे रखा। “कुछ लोग नक्सलवाद को विकास की लड़ाई बताते रहे, जबकि सच यह है कि नक्सलवाद ने ही विकास को रोका,” उन्होंने कहा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 31 मार्च 2026 के बाद नक्सलवादी बस्तर के विकास और लोगों के अधिकारों को बाधित नहीं कर पाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में 500 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में आने का रास्ता चुना है और हर गाँव से नक्सलवाद हटाने के बाद सरकार वहाँ 1 करोड़ रुपए का विकास पैकेज देगी।

जनजातीय गौरव और योजनाओं की सौगात

गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने आदिवासी सम्मान के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं — द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाना, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को आदिवासी गौरव दिवस घोषित करना और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हजारों घर स्वीकृत करना। उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के मंच से ही आज महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त के रूप में 70 लाख माताओं को 607 करोड़ रुपये वितरित किए गए और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का शुभारंभ हुआ, जिससे बस्तर और सरगुजा के 250 गाँव जोड़े जाएंगे