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नक्सलवाद समाप्ति की ओर 20% ही समस्या शेष, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा बयान, विजय शर्मा ने क्या कहा देखिए वीडियो….

इंद्रावती किनारे शांति का सपना “वह दिन दूर नहीं जब चाय पीते नजर आएंगे युवा”।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में नक्सलवाद को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद की समाप्ति की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, और वर्तमान में केवल 20 प्रतिशत ही समस्या शेष है, जिस पर सरकार पूरी ताकत से काम कर रही है।

सिर्फ सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के कुछ हिस्सों में नक्सल समस्या

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब नक्सलवाद की सक्रियता केवल कुछ सीमित इलाकों तक सिमट गई है। सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर इन जिलों के कुछ इलाकों में ही नक्सली मौजूदगी बची है, जहां बेहतर इंटेलिजेंस और आक्रामक रणनीति के साथ कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों को भी पूरी तरह नक्सल मुक्त किया जाए।

विजय शर्मा ने बताया कि बस्तर बेहद तेज़ी से शांति और विकास की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दृढ़ विश्वास जताते हुए कहा “वह दिन दूर नहीं जब बस्तर का युवा इंद्रावती नदी के किनारे बैठकर चाय पिएगा। बस्तर के विकास का नेतृत्व अब यहीं के लोग करेंगे और नया बस्तर बस्तरवासियों के हाथों ही तैयार होगा।”

चैतू दादा और श्याम के आत्मसमर्पण पर खुशी।

गृह मंत्री ने दरबार डिवीजन के इंचार्ज चैतू दादा (श्याम) और उसके साथियों के आत्मसमर्पण को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि चैतू दादा झीरम घाटी हमले में शामिल नक्सली एरा (ERA) के प्रमुख सदस्यों में से था। उसका सरेंडर संगठन के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है।

“अब कुछ ही नक्सली बचे—उन्हें भी पुनर्वास में आने की अपील”।

 

उन्होंने बताया कि अब बस्तर में गिने-चुने नक्सलियों की ही मौजूदगी रह गई है। सरकार उन्हें पुनर्वास योजना के तहत समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर दे रही है। गृह मंत्री ने चेतावनी भरे स्वर में कहा—“जो नक्सली अब भी पुनर्वास में नहीं लौटना चाहते, हम उनसे अपील करते हैं। अन्यथा हमारे जवान उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं।”

 

गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छा शक्ति ने बदला देश का नक्शा”।

 

विजय शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विशेष रूप से आभार जताते हुए कहा—“अमित शाह साहसिक निर्णय लेने वाले नेता हैं। उनकी इच्छाशक्ति और नेतृत्व के कारण आज देश में कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित हो रही है।”उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की साझा रणनीति ने नक्सलवाद को लगातार कमजोर किया है।

बस्तर में नक्सलवाद तेजी से कमजोर पड़ा है और सरकार के मुताबिक आने वाले कुछ महीनों में बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त क्षेत्र के रूप में उभर सकता है। चैतू दादा जैसे कुख्यात नक्सलियों का सरेंडर, सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति और स्थानीय जनसहयोग ने बस्तर में शांति की नई शुरुआत का मार्ग खोल दिया है।