नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में बदली तस्वीर: अब गांवों में स्कूलों की वापसी की मांग, 500 से अधिक ग्रामीणों ने की 12 किलोमीटर पैदल यात्रा।

दंतेवाड़ा। जिस दंतेवाड़ा में कभी नक्सलियों ने स्कूल भवनों को निशाना बनाकर शिक्षा की लौ बुझाने का प्रयास किया था, आज उसी दंतेवाड़ा के अंदरूनी इलाकों से बदलाव की नई तस्वीर सामने आ रही है। नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और क्षेत्र में सामान्य हालात लौटने के बाद अब ग्रामीण अपने गांवों में स्कूलों की पुनः स्थापना की मांग को लेकर एकजुट हो रहे हैं। ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित किए जा रहे हैं और जिला प्रशासन से वर्षों पहले स्थानांतरित किए गए विद्यालयों को वापस गांवों में संचालित करने की मांग उठ रही है। इसी क्रम में दक्षिण बस्तर के बड़े लखापाल गांव के 500 से अधिक ग्रामीणों ने करीब 12 किलोमीटर पैदल यात्रा कर ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय को एक सप्ताह के भीतर पुनः बड़े लखापाल में संचालित किया जाए। मांग पूरी नहीं होने पर कलेक्टर परिसर के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है।

2009 से 2016 तक बड़े लखापाल में संचालित था विद्यालय।
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय वर्ष 2009 से 2016 तक ग्राम पंचायत बड़े लखापाल में सफलतापूर्वक संचालित होता रहा। वर्ष 2016-17 में बिना ग्रामसभा की सहमति के विद्यालय को बड़े गुडरा स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे क्षेत्र की छात्राओं को आवासीय शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामसभा की सहमति के बिना हुआ स्थानांतरण।
ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यालय को स्थानांतरित किए जाने के बाद बड़े लखापाल सहित आसपास के गांवों की बालिकाएं आवासीय शिक्षा की सुविधा से वंचित हो गई हैं। बड़े लखापाल का भौगोलिक क्षेत्र व्यापक होने के कारण यहां विद्यालय की आवश्यकता पहले से अधिक है, ताकि छात्राओं को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवासीय सुविधा मिल सके।

कई बार उठाई मांग, नहीं हुई कार्रवाई।
ग्रामीणों का कहना है कि इस विषय को लेकर ग्रामसभा द्वारा कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष मांग रखी गई, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पैदल मार्च निकालकर अपनी मांग जिला प्रशासन तक पहुंचाई।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, नहीं तो होगा आंदोलन
ग्रामीणों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए मांग की है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय को पुनः बड़े लखापाल में संचालित करने का आदेश जारी किया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो सभी ग्रामीण दंतेवाड़ा कलेक्टर परिसर के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

बदलते दंतेवाड़ा की नई तस्वीर।
एक समय नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे दंतेवाड़ा में जहां कभी स्कूलों को विस्फोट कर शिक्षा व्यवस्था को बाधित किया गया था, वहीं आज ग्रामीण स्वयं शिक्षा के अधिकार के लिए आगे आकर स्कूलों की वापसी की मांग कर रहे हैं। यह बदलते बस्तर और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता की एक महत्वपूर्ण तस्वीर मानी जा रही है।