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बालपेट पटेलपारा में आज भी ‘खाट ही एंबुलेंस’, मरीजों को दो किलोमीटर पैदल ढोने की मजबूरी।

 

करोड़ों का खनिज राजस्व, फिर भी सड़क से महरूम गांव!

दंतेवाड़ा। एक तरफ सरकार गांव-गांव तक सड़क और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर बालपेट के पटेलपारा में बारिश के दिनों में खाट ही एंबुलेंस बन जाती है। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस पहुंच नहीं पाती और गंभीर मरीजों को खाट पर लिटाकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ता है।

बारिश में बढ़ जाती है ग्रामीणों की मुसीबत

बालपेट पटेलपारा कोई ऐसा इलाका नहीं है, जो जिला मुख्यालय से बेहद दूर या पहुंच से बाहर हो। इसके बावजूद गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है। बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस चालक गांव के अंदर वाहन ले जाने से मना कर देते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, चालकों को एंबुलेंस के कीचड़ में फंसने का डर रहता है। इसके बाद मरीज के परिजनों और ग्रामीणों के सामने एक ही रास्ता बचता है—बीमार व्यक्ति को खाट पर लिटाकर कंधों के सहारे बालूद गांव तक पहुंचाना। ग्रामीणों के अनुसार बालूद तक करीब दो किलोमीटर का रास्ता है, जहां से एंबुलेंस मरीज को अस्पताल ले जाती है।

गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए सबसे बड़ी परेशानी

सबसे ज्यादा परेशानी उस समय होती है, जब गांव में गंभीर रूप से बीमार मरीज या गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंचने के कारण परिवार और ग्रामीण मरीज को खाट पर लिटाकर कीचड़ भरे रास्ते में पैदल चलने को मजबूर होते हैं। ऐसे हालात में मरीज की हालत रास्ते में बिगड़ जाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है।

सड़क के लिए कई बार लगाई गुहार, अब तक सिर्फ आश्वासन

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। साल दर साल विकास योजनाएं बनती रहीं, लेकिन बालपेट पटेलपारा तक सड़क नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सड़क केवल आवागमन के लिए नहीं, बल्कि आपात स्थिति में जिंदगी बचाने के लिए चाहिए।

खनिज संपदा से समृद्ध जिले में विकास पर सवाल

दंतेवाड़ा देश के प्रमुख खनिज संपदा वाले जिलों में शामिल है। जिले से करोड़ों रुपये का खनिज राजस्व शासन को प्राप्त होता है। ऐसे में जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर किसी गांव में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए खाट और ग्रामीणों के कंधों का सहारा लेना पड़े, तो यह विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है।सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय के इतने करीब सड़क और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही हैं, तो विकास योजनाओं और खनिज राजस्व का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

ग्रामीणों का दर्द—कब बनेगी सड़क?

बारिश आते ही बालपेट पटेलपारा के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। कीचड़ भरे रास्ते, एंबुलेंस की पहुंच से बाहर गांव और मरीजों को खाट पर ढोने की मजबूरी यहां की जमीनी हकीकत बन चुकी है।ग्रामीण अब आश्वासन नहीं, पक्की सड़क और गांव तक निर्बाध एंबुलेंस सुविधा चाहते हैं। सवाल यही है कि क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद प्रशासन जागेगा या उससे पहले ही बालपेट पटेलपारा तक सड़क पहुंचेगी?

 जल्द ही गांव में टेक्निकल टीम भेजकर सड़क का प्रतिवेदन बनाने का निर्देश दिया जाएगा, बजट उपलब्धता के आधार पर सड़क की स्वीकृति की जाएगी।  :- देवेश ध्रुव दंतेवाड़ा कलेक्टर