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छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ का अनिश्चित कालीन हड़ताल सातवे दिन भी जारी।

छत्तीसगढ़ फड़मुंशी संघ ने दिया समर्थन।

आश्वाशन से नहीं आदेश से बनेगी बात : लहरे

संवाद एक्सप्रेस रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ का अनिश्चित कालीन हड़ताल सातवे दिन भी पूरे प्रदेश में जारी रहा। वही हड़ताल को आज दंतेवाड़ा सहित अन्य जिलों में छत्तीसगढ़ फड़मुंशी ने भी अपना समर्थन दिया। प्रबंधकों के धरना स्थल पहुंचे फड़मुंशियो ने प्रबंधकों के साथ हम सब एक हैं, प्रबंधक संघ जिंदाबाद, फड़मुंशी संघ जिंदाबाद के नारे लगाए। वही छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामाधर लहरे ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि जब तक हमारी मांगे लिखित में पूर्ण नहीं होती प्रबंधक संघ की हड़ताल जारी रहेगी। लहरे ने कहा शासन प्रशासन द्वारा विगत 36 वर्षों से प्रबंधकों को सिर्फ और सिर्फ नियमितीकरण का आश्वासन ही दिया जा रहा है उस पर अमल नहीं किया जा रहा है। प्रबंधक 36 वर्षों से प्रदेश के 14 लाख से भी अधिक परिवारों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिला रहे हैं। किन्तु वर्षों से प्रबंधको को शासन-प्रशासन द्वारा छला जा रहा है।

दस हजार से ज्यादा फड़मुंशियो के आंदोलन में शामिल होने से बढ़ेगी सरकार की परेशानी।

छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर प्रदेश के 10 हजार से अधिक फड़मुंशीयों के शामिल होने से शासन-प्रशासन की मुश्किलें बढ़ना तय है। बता दे कि तेंदुपत्ता फड़मुंशी भी विगत कई वर्षों से जनता को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं मोदी की गारंटी (भाजपा की घोषणा पत्र) में भी फड़मुंशी को वार्षिक 25000 देने की गारंटी दी गई थी जिसका पालन भी आज तक नहीं हुआ है जिससे प्रदेश के फड़मुंशी में भी काफी आक्रोष देखा जा रहा है। अभी छत्तीसगढ़ में 902 प्रबंधक एवं 10हजार से अधिक फड़मुंशी लघुवनोपज संघ से जुड़े हुए हैं। अभी सिर्फ प्रबंधक हड़ताल कर रहे है उनके हड़ताल को वनकर्मचारी संघ, लिपिक संघ एवं अन्य संगठनों का पूर्व में ही समर्थन मिल गया है। फड़मुंशियो के समर्थन एवं हड़ताल में शामिल होने से सरकार की मुश्किलें बढ़ना तय है।

विपरीत परिस्थितियों में हार नही मानते- राकेश कवासी।
दंतेवाड़ा प्रबंधक संघ के जिला अध्यक्ष राकेश कवासी ने बताया कि लघु वनोपज संघ के प्रबंधक दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, जगदलपुर, बस्तर जैसे बहुत से अति संवेदनशील क्षेत्रों में भी आम जनता को फायदा पहुंचाने दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। चाहे कोरोना काल हो चाहे कितनी भी विपरीत नक्सली समस्या हो हमने कभी हार नहीं माना। प्रदेश के बहुत सारे प्रबंधक रिटायर हो गए कई लोगों का देहांत हो गया उसके बाद भी शासन- प्रशासन का नजर हम पर नहीं पड़ रहा है। शासन-प्रशासन द्वारा प्रबंधकों के रिटायरमेंट में भी उनके परिवार के जीवन यापन के लिए किसी भी प्रकार की मदद नहीं पहुंचाया जाता है यहां तक कि उनके परिवार या प्रबंधक को एक विदाई समारोह तो छोड़िया एक छोटा सा फूल देने की जरूरत तक नहीं समझते। इससे प्रदेश के बहुत सारे प्रबंधक अपने को कहीं ना कहीं विभाग से शासन से प्रदर्शन से वंचित मानने लगे हैं। श्री कवासी ने आगे कहा कि हमें पूर्ण विश्वास हैं कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय जो की आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के हैं एवं खुद भी आदिवासी हैं हमारे दर्द को जरूर समझेंगे और हमें न्याय दिलाएंगे। साथ ही प्रबंधकों के 36 वर्षों से लटकी हुई नियमितीकरण की मांग को जरूर पूर्ण करेंगे।