छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ का अनिश्चित कालीन हड़ताल दसवें दिन भी जारी।

हड़ताल से तेंदुपत्ता शाख कर्तन हो रहा प्रभावित।
संवाद एक्सप्रेस रायपुर/ दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ का अनिश्चित कालीन हड़ताल दसवें दिन भी पूरे प्रदेश में जारी रहा। वहीं प्रबंधकों का हड़ताल लगातार जारी रहने से शाखकर्तन कार्य पूर्ण रूप से प्रभावित हो रहा है। तेंदूपत्ता शाखकर्तन एक सीमित समय पर होने वाला कार्य है यदि तेंदूपत्ता का शाखकर्तन सही समय पर नहीं कराया गया तो तेंदूपत्ता की फसल प्रभावित होने का भी खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही पत्ते की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। बता दें कि बस्तर में जहां तेंदूपत्ता शाखकर्तन का कार्य फरवरी माह में ही पूर्ण क्यों कर लिया जाता है जिसमें अक्सर 15 फरवरी से 28 फरवरी के मध्य शाखकर्तन कार्य पूर्ण कर लिया जाता है। जिससे समय पर अप्रैल 20 से तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य शुरू हो सके। तेंदूपत्ता को छत्तीसगढ़ का हरा सोना भी इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ के 14 लाख से ज्यादा परिवार को फायदा होता है। साथ ही उन्हें मृत्यु दावा प्रकरण, छात्रवृत्ति, चरणपादुका सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिलता है। वही तेंदूपत्ता संग्रहण से हर वर्ष 700 करोड़ से भी अधिक राशि संग्रहण पारिश्रमिक एवं 500 करोड़ से भी अधिक राशि बोनस के रूप में भुगतान होता है।

प्रबंधकों के हड़ताल के चलते सुकमा में खाली रहा शाखकर्तन कार्यशाला। हर वर्ष 200 से अधिक ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, फड़मुंशी एवं अधिकारी होते थे शामिल।
शाखकर्तन(बुटाकटाई) का महत्व।
तेंदूपत्ता संग्रहण से 45 दिन पहले शाखकर्तन सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। तेंदूपत्ता संग्रहण के 45 दिन पहले तेंदूपत्ता के पौधों को जमीन से 1 इंच नीचे से काट दिया जाता है। शाखकर्तन के कारण ही का तेंदूपत्ता का बूटा 45 दिनों में घने पौधे का रूप ले लेता है। पूर्ण एवं अच्छा शाखकर्तन होगा तभी तेंदूपत्ता का फसल अच्छा होगा एवं संग्राहको को लाभ होगा। यदि समय से तेंदूपत्ता का शाखकर्तन कार्य नहीं कर जाता है तो फसल पूर्ण रूप से खराब होने की संभावना बढ़ जाएगी।