
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस के बढ़ते प्रभाव का असर।
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में पुलिस और प्रशासन के प्रयासों का सकारात्मक असर दिखने लगा है। पीएलजीए बटालियन नंबर 01 और जगरगुंडा एरिया कमेटी में सक्रिय 6 महिला नक्सली समेत 9 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 1 पुरुष नक्सली पर 8 लाख, 2 महिला नक्सलियों पर 5-5 लाख और 4 अन्य नक्सलियों पर 2-2 लाख का इनाम घोषित था। कुल मिलाकर 26 लाख रुपये के इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
सरकार की नीति और पुलिस के बढ़ते प्रभाव का असर।
इन नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ सरकार की “नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति” और “नियद नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया। सुकमा पुलिस द्वारा अंदरूनी इलाकों में लगातार सुरक्षा कैंपों की स्थापना और पुलिस की बढ़ती पैठ के चलते ये नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं।
कौन-कौन से नक्सली हुए आत्मसमर्पित?
1. बंडू उर्फ बंडी मड़काम (इनाम ₹8 लाख) – पीएलजीए बटालियन 01 का सदस्य
2. मासे उर्फ वेट्टी कन्नी (इनाम ₹5 लाख) – जगरगुंडा एरिया कमेटी की कृषि शाखा अध्यक्ष
3. पदाम सम्मी (इनाम ₹5 लाख) – जगरगुंडा एरिया कमेटी केएएमएस अध्यक्षा
4. माड़वी हुंगा उर्फ कुव्वर हुंगा (इनाम ₹2 लाख) – कंचाल आरपीसी मिलिशिया कमांडर
5. पुनेम मगंडी (इनाम ₹2 लाख) – जोनागुड़ा आरपीसी केएएमएस अध्यक्षा
6. कड़ती विज्जे उर्फ जयो (इनाम ₹2 लाख) – दक्षिण बस्तर डिवीजन सीएनएम पार्टी सदस्य
7. मड़काम शांति (इनाम ₹2 लाख) – दक्षिण बस्तर डिवीजन कृषि कमेटी सदस्य
8. मुचाकी मासे (इनाम ₹2 लाख) – केएमएस उपाध्यक्ष, दुलेड़ आरपीसी
9. कड़ती हिड़िया उर्फ हितेष (इनाम ₹2 लाख) – सीएनएम उपाध्यक्ष, दुलेड़ आरपीसी
प्रशासन और पुलिस की अहम भूमिका।
आत्मसमर्पण को लेकर सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के नेतृत्व में CRPF 241 बटालियन, 203 कोबरा बटालियन, DIG ऑफिस RFT सुकमा/कोंटा और थाना चिंतलनार की टीमों ने विशेष भूमिका निभाई।
समर्पण करने वालों को सहायता राशि और पुनर्वास सुविधाएं।
सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि, कपड़े, मिठाई और अन्य पुनर्वास सुविधाएं दी गईं। इसके अलावा, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए मदद दी जाएगी।
नक्सलियों का पुलिस और प्रशासन पर बढ़ता भरोसा।
हाल के दिनों में बस्तर में नक्सलियों का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है। इसी का नतीजा है कि अब वे आत्मसमर्पण कर शांति की राह अपना रहे हैं। सरकार की योजनाएं और पुलिस का जनसम्पर्क अभियान इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस के बढ़ते प्रभाव के चलते नक्सल संगठन कमजोर पड़ रहा है। आत्मसमर्पण की यह बढ़ती संख्या बताती है कि अब नक्सलवाद के खिलाफ प्रशासन की रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है।