Narayanpur

जहां कभी गूंजती थी गोलियों की आवाज, वहां पहली बार लोकतंत्र ने दी दस्तक।

नक्सलगढ़ पदमकोट में पहली बार ग्राम सभा का आयोजन।

सुरेश सोनी नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुदूर अति संवेदनशील क्षेत्र बेड़माकोटी में 77 साल बाद पहली बार लोकतंत्र की जीत का ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। वर्षों तक जहां नक्सलियों का खौफ था, वहां अब विकास की गूंज सुनाई देने लगी है। ग्राम पंचायत पदमकोट के अंतर्गत पहली बार निर्भीक रूप से ग्रामसभा का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘नियद नेल्लानार – हमारा आदर्श ग्राम’ के तहत किया गया। इसी के तहत 23 मार्च को क्षेत्र में सुरक्षा एवं जन सहायता सुविधा कैंप भी स्थापित किया गया, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके।

प्रशासन की पहल से मुमकिन हुआ ऐतिहासिक आयोजन

नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश पर ग्राम पंचायत पदमकोट के घोटूल में पहली बार ग्रामसभा का आयोजन हुआ। वर्षों से नक्सल हिंसा से जूझते इस क्षेत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण था, जहां ग्रामीणों ने भयमुक्त वातावरण में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया।

ग्रामसभा में उठीं विकास की मांगें

ग्रामसभा के दौरान ग्रामीणों ने शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने की इच्छा जताई और सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए। इनमें मुख्य रूप से स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, बी1, मिशल बंदोबस्त और अधिकार अभिलेख जैसे आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता की मांग की गई।

इसके अलावा, ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत जरूरतों को लेकर भी मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से…
✅ ग्राम पंचायत भवन का निर्माण
✅ राशन दुकान की स्थापना
✅ आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक शाला का संचालन
✅ मनरेगा योजना के तहत भूमि समतलीकरण और डबरी निर्माण
✅ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घरों का निर्माण
✅ स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय सुविधा
✅ पेयजल व्यवस्था के लिए हैंडपंप
✅ गांव में विद्युतीकरण

‘प्रशासन आपके द्वार’ से बढ़ा भरोसा

इस आयोजन से स्पष्ट हो गया कि सरकार की ‘प्रशासन आपके द्वार’ पहल पर अब ग्रामीणों का विश्वास बढ़ रहा है। वर्षों तक नक्सलियों के डर से चुप रहने वाले ग्रामीण अब खुलकर अपनी जरूरतों और अधिकारों की बात कर रहे हैं।

नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र में लोकतंत्र की जीत

बेड़माकोटी में पहली बार हुए इस ऐतिहासिक ग्रामसभा आयोजन ने यह साबित कर दिया कि अब इस क्षेत्र में बदलाव की बयार बह रही है। कभी जहां नक्सली बंदूक के दम पर फैसले सुनाते थे, वहां अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत जनता अपनी मांगें रख रही है। यह न केवल प्रशासन और सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता है, बल्कि ग्रामीणों के लिए भी एक नई उम्मीद की किरण है।