CHHATTISGARH

जैविक खाद अपनाने किसानों से अपील, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में कारगर,जिले की सहकारी समितियों में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण

 

जैविक खाद अपनाने किसानों से अपील, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में कारगर,जिले की सहकारी समितियों में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण

नारायणपुर, 29 मई 2026// राज्य शासन की मंशानुरूप एवं कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जिले में आगामी खरीफ सीजन 2026 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। किसानों को समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले की सहकारी समितियों में बड़े पैमाने पर उर्वरक एवं बीज का भंडारण किया जा रहा है।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले को यूरिया 1545 मीट्रिक टन, डीएपी 800 मीट्रिक टन, सुपर फास्फेट 300 मीट्रिक टन, पोटाश 500 मीट्रिक टन तथा एनपीके 1500 मीट्रिक टन सहित कुल 4645 मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक यूरिया 1059 मीट्रिक टन, डीएपी 280 मीट्रिक टन, पोटाश 33 मीट्रिक टन, एसएसपी 15 मीट्रिक टन एवं एनपीके (20:20:0:13) 182 मीट्रिक टन सहित कुल 1569 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है।
वहीं किसानों द्वारा अग्रिम उठाव भी शुरू हो गया है। अब तक कृषकों द्वारा यूरिया 82 मीट्रिक टन, डीएपी 67 मीट्रिक टन, एमओपी 3 मीट्रिक टन एवं एनपीके 33 मीट्रिक टन सहित कुल 185 मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव किया जा चुका है।धान बीज भंडारण के लिए जिले में 1950 क्विंटल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध 748.20 क्विंटल धान बीज सहकारी समितियों में उपलब्ध कराया जा चुका है। किसानों द्वारा 7.20 क्विंटल धान बीज का उठाव भी किया गया है।
इसके अलावा हरी खाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ढैंचा 52 क्विंटल एवं मूंग 26 क्विंटल का भंडारण भी किया गया है। कृषि विभाग ने बताया कि जिले में उर्वरक एवं बीज भंडारण का कार्य लगातार जारी है, ताकि खरीफ सीजन में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसानों से प्राकृतिक अपशिष्टों से तैयार होने वाली जैविक खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की गई है। गोबर, गोमूत्र, हरी पत्तियों, फसल अवशेषों एवं केंचुओं की सहायता से तैयार की जाने वाली जैविक खाद खेती के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। यह मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती है, जिससे फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन में वृद्धि होती है।
लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि जैविक खाद मिट्टी की संरचना को सुधारने, नमी बनाए रखने और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ाने में सहायक होती है। इससे भूमि लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत एवं अन्य जैविक खादों का उपयोग बढ़ाएं। इससे खेती की लागत में कमी आएगी तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त कृषि उत्पाद प्राप्त होंगे।
जैविक खेती अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।