करेंगट्टा के घने जंगलों में पांचवे दिन भी निर्णायक जंग जारी नक्सलियों के गढ़ पर सबसे बड़ा संयुक्त ऑपरेशन।

बस्तर । करीब 5 हजार फीट ऊंचे पहाड़ी इलाके, 44 डिग्री तापमान और कम ऑक्सीजन स्तर वाली करेंगट्टा घाटी में नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त ऑपरेशन जारी है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना पुलिस बल के 5 से 8 हजार जवान पिछले चार दिनों से लगातार जंगल और पहाड़ों में पैदल मार्च कर रहे हैं। ऑपरेशन के दौरान अब तक रुक-रुक कर हुई मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे जाने की खबर है। पुलिस ने 3 महिला नक्सलियों के शवों के साथ भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए हैं।
नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक जंग
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने इसे नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई बताया है। सूत्रों के मुताबिक, करेंगट्टा पहाड़ की चोटी पर करीब 200 से अधिक नक्सली जंग के लिए तैयार बैठे हैं। उनके पास LMG, AK-47, SLR, इंसास, हैंड ग्रेनेड और BGL लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार मौजूद हैं। हालांकि, नक्सलियों के बीच राशन की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिससे उनकी स्थिति कमजोर होती जा रही है।
करेंगट्टा: नक्सलियों का अभेद्य किला
करेंगट्टा, कोत्तापल्ली, पुजारी कांकेर, धर्मावरम और नम्बी के ऊपरी हिस्से को नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है। यही इलाका छत्तीसगढ़ और तेलंगाना स्टेट कमेटी के ऑपरेशनों का मुख्यालय रहा है। अब इसी क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में तैनाती कर नक्सलियों को घेर लिया है।
भूख या हथियार डालने का संकट
जानकारी के अनुसार अगर फोर्स एक महीने तक पहाड़ के नीचे बेस बनाकर जमी रहती है, तो नक्सली या तो भूख से मरने को मजबूर होंगे या हथियार डालकर आत्मसमर्पण करना उनका एकमात्र विकल्प रह जाएगा। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में नक्सलियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर मुठभेड़ हो सकती है।
कोत्तापल्ली: फोर्स का मुख्य आधार
तेलंगाना के चेरला से लगभग 30-35 किमी दूर कोत्तापल्ली गांव ऑपरेशन का मुख्य आधार बन गया है। वहीं छत्तीसगढ़ की ओर पुजारी कांकेर के बाद 40-50 किमी के दायरे में कोई बड़ा गांव नहीं है, जिससे ऑपरेशन के दौरान फोर्स को लॉजिस्टिक सपोर्ट की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
आखिरी मोर्चा
सूत्रों का दावा है कि करेंगट्टा पहाड़ पर फंसे नक्सली पूरी तैयारी के साथ मुकाबले में डटे हैं, लेकिन फोर्स की रणनीतिक पकड़ और निरंतर दबाव के चलते अब निर्णायक पल नजदीक आ चुका है। आने वाले कुछ दिनों में नक्सली गढ़ को ध्वस्त करने की पूरी संभावना है।