BASTARCHHATTISGARHNaxalआत्मसमर्पण

बस्तर में नक्सल उन्मूलन को बड़ी कामयाबी, 5 जिलों में 66 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण।

 

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। “पूना मारगेम”पुनर्वास से पुनर्जीवन – अभियान के तहत बस्तर के 5 नक्सल प्रभावित जिलों में कुल 66 माओवादी आत्मसमर्पण के लिए सामने आए हैं। इन नक्सलियों में कई इनामी और खूंखार माओवादी शामिल हैं, जिन पर कुल ₹2 करोड़ 27 लाख का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों और सरकार की रणनीति की बड़ी सफलता मानी जा रही है।


जिलावार आत्मसमर्पण का ब्यौरा:

▪️ बीजापुर – 25 नक्सली, कुल इनाम ₹1.15 करोड़
▪️ नारायणपुर – 8 नक्सली, कुल इनाम ₹33 लाख
▪️ सुकमा – 5 नक्सली
▪️ दंतेवाड़ा – 15 नक्सली, कुल इनाम ₹17 लाख
▪️ कांकेर – 13 नक्सली, कुल इनाम ₹65 लाख


बीजापुर में सबसे बड़ी कामयाबी।
बीजापुर जिले से आत्मसमर्पण करने वालों में स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य रामन्ना ईरपा उर्फ जगदीश उर्फ विकेश का नाम प्रमुख है, जिस पर ₹25 लाख का इनाम था। यह माओवादी संगठन में लंबे समय से सक्रिय था और कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है।

 

पुलिस और प्रशासन का बयान:
बस्तर रेंज के आईजी और संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने इसे माओवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़ करार दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से क्षेत्र में शांति, विकास और विश्वास का वातावरण मजबूत होगा।

पुनर्वास योजना के अंतर्गत लाभ:
इन सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को सरकार की “नियद नेल्ला नार योजना” के तहत पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा। इसमें आवास, आर्थिक सहायता, शिक्षा, स्वरोजगार और समाज में पुनर्स्थापन जैसे सुविधाएं शामिल हैं।

 

क्या है “पूना मारगेम अभियान”?
“पूना मारगेम” का अर्थ होता है – पुनर्वास से पुनर्जीवन
यह अभियान माओवादियों को हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और समाज के साथ एक सम्मानजनक जीवन शुरू करने के लिए प्रेरित करता है। इस पहल को बस्तर में मिल रही सफलता ने एक नई दिशा दी है।