CHHATTISGARHDantewadaRed water

लाल पानी की बोतल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, बोले—खनन के प्रदूषण से बर्बाद हो रहे खेत।

दंतेवाड़ा। आयरन हिल के नीचे बसे गांवों में लंबे समय से जारी लाल पानी और आयरन ओर डस्ट की समस्या को लेकर ग्रामीणों का दर्द एक बार फिर सामने आया। बीजापुर जिले के गमपुर, डोडी तुमनार, तामोड़ी, पुरंगेल सहित करीब आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण हाथ में लाल पानी की बोतल लेकर अपनी समस्या का नमूना दिखाने दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट पहुंचे।
ग्रामीणों का आरोप है कि दंतेवाड़ा जिले के बचेली और किरंदुल क्षेत्र में एनएमडीसी के लौह अयस्क खनन से निकलने वाला आयरन ओर डस्ट और लाल पानी पहाड़ों से बहकर बीजापुर जिले के निचले इलाकों में पहुंच रहा है। इससे खेतों की जमीन और जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से खेतों में लाल पानी जमा होने के कारण कृषि कार्य मुश्किल हो गया है और कई जगह जमीन की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हुई है।


मवेशियों और पेयजल को लेकर भी चिंता।

ग्रामीणों ने बताया कि प्रदूषित पानी की समस्या केवल खेती तक सीमित नहीं है। मवेशी भी इसी पानी की चपेट में आ रहे हैं। कई गांवों में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण नाले के किनारे बनाए गए अस्थायी कुओं के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में जल प्रदूषण ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

कलेक्टर से नहीं हो पाई मुलाकात।

अपनी समस्या का नमूना लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों की कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो पाई। ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात नहीं होने के बाद उन्हें निराश होकर वापस गांव लौटना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर क्षेत्र में खनन और विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों के नीचे बसे गांवों को लाल पानी, धूल और मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से लाल पानी और आयरन ओर डस्ट की समस्या की जांच कराने, प्रभावित खेतों और जलस्रोतों का सर्वे कराने तथा गांवों में स्वच्छ पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में खेती, पेयजल और ग्रामीणों की आजीविका पर इसका और गंभीर असर पड़ सकता है।