मातृ पितृ दिवस मनाने के बजाय मिशनरी निजी स्कूलों ने दी छुट्टी- धीरेंद्र प्रताप
शिक्षामंत्री के मातृ पूजन दिवस मनाने आदेश को दरकिनार किया।
संवाद एक्सप्रेस दंतेवाड़ा। भाजपा जिला महामंत्री व नगर पालिका उपाध्यक्ष दंतेवाड़ा धीरेन्द्र प्रताप ने कहा की मिशनरी स्कूलों की मनमानी से छात्र व अभिभावक नाराज है | बच्चों को संस्कारों की शिक्षा देने के लिए प्रदेश सरकार की अनुठी पहल से जहां प्रदेश भर के स्कूलों में 14 फरवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर मातृ पूजन दिवस धूमधाम एवं उत्साह के साथ मनाया गया वहीं जिले
में संचालित एक निजी स्कूल दंतेवाड़ा में स्थित छोटे बच्चों के नर्सरी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। श्री धीरेन्द्र प्रताप ने कहा की ऐसा कर मिशनरी स्कूल संचालकों ने न केवल सरकारी आदेश की अवहेलना की है बल्कि उन सैकड़ों अभिभावकों का भी दिल दुखाया है जिनके
बच्चे मोटी फीस देकर स्कूलों में अच्छे संस्कार पाने एवं शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान की देवी माता सरस्वती की पूजा के साथ-साथ
इस दिन स्कूलों में बच्चे अपने माता पीता की पूजा के साथ साथ गुरूजनों की भी पूजा वंदना करते
हैं। छग सरकार के शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने 14 फरवरी को विशेष आदेश निकालकर कहा था कि प्रदेश के तमाम सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में बसंत पंचमी के अवसर को मातृ पूजन दिवस के रूप में मनाया जाएगा वहीं दंतेवाड़ा के निजी स्कूल कारली
व उन्हीं की दंतेवाड़ा में संचालित नर्सरी स्कूल ने शिक्षा मंत्री के आदेशों को धता बताते बसंत पंचमी त्यौहार से परहेज करते हुए स्कूल ने 14 फरवरी को बच्चो की छुटटी कर दी गयी जिसके चलते बच्चे स्कूल में न तो मां सरस्वती देवी की पूजा ही कर पाए और न ही अभिभावकों व गुरुजनों की पूजा वंदना कर सके
और यह भी ज्ञात हुआ है कि न केवल दंतेवाड़ा बल्कि पूरे प्रदेशों के मिशनरी स्कूलों में बसंत पंचमी का पर्व नहीं मनाया गया और सभी स्कूलों में छुटटी करदी गई थी। धीरेन्द्र प्रताप ने कहा की निजी स्कूल में सैकड़ों की संख्या में हिन्दु बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं इन्हीं बच्चो की फीस से स्कूल चल रहे हैं। इन स्कूलों
में किताबी ज्ञान तो दिया जा रहा है मगर जब हिन्दू संस्कारों एवं तीज त्यौहारों की बात आती है तो
स्कूल प्रबंधन इससे अपने को अलग कर लेता है और बहाना इत्यादि बनाकर स्कूलों की छुटटी कर देता है। क्या इसे ही शिक्षा का मंदिर कहते हैं। जिन स्कूलों
में संस्कार नहीं वह कैसा शिक्षा का मंदिर हो सकता है | बात जब गुड फ्राईड, ईस्टर व इनके धर्मो से जुड़े त्यौहारों का समय होता है तो स्कूलों में कोई छुटटी नहीं दी जाती बल्कि बच्चो को बढ़ चढ़कर कार्यक्रमों के लिए तैयार किया जाता है। जब हिन्दु त्यौहारों की आती है तो स्कूल प्रबंधन बहाना बनाकर या तो
स्कूलों की छुटटी कर देता है या फिर स्कूलों में उन त्यौहारों को मनाया ही नहीं जाता जो हिन्दु संस्कारों व तीज त्यौहारों से तालुक रखता हो । स्कूल प्रबंधन का यह कृत्य बच्चों के साथ भेदभाव को दर्शाता है।
श्री धीरेन्द्र प्रताप ने कहा की दंतेवाड़ा में संचालित दोनों मिशनरी स्कूलों में बसंत पंचमी पर मातृ पूजन दिवस नहीं मनाये जाने एवं त्यौहार मनाने के डर से स्कूलों की छुटटी कर देने का मामला सामने आया है। जिसके बाद से कई अभिभावक स्कूल के ऐसे रवैये से नाराज है | 14 फरवरी को मिशनरी स्कूलों में अवकाश दिये जाने एवं मातृ पूजन दिवस नहीं मनाये जाने को लेकर शिकायत की जायेगी और कार्यवाही की मांग की जायेगी।
