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नक्सलगढ़ मे बंदूक़ की गोलियों की गूंज नही, अब बजेगी फ़ोन की घंटी।

अतिसंवेदनशील इलाक़ों मे लगातार खुल रहे नवीन कैंपों के बाद खुल रहे विकास के नये द्वार।

सुकमा। जिन ईलाको में पहले नक्सलियों के बंदूक के गोलियों की गूंज रहती थी धीरे-धीरे विकास की आधारशिला रखी जा रही है जिसका ही नतीजा है की संवेदनशील इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ रही है यहां के लोग मोबाइल एवं इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। सरकार एवं जिला प्रशासन एवं पुलिस बल द्वारा सुकमा जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में नक्सल उन्मूलन के साथ साथ नियद नेल्लानार योजना के तहत विकास भी पंहुचाया जा रहा है। सुकमा जिला मुख्यालय से लगभग कटऑफ़ हो चुके गाँव अब विकास से जुड़ने लगे हैं, सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के अथक प्रयास से नियद नेल्लानार के तहत धुर नक्सल प्रभावित गांव सलातोंग एवं बेदरे मे जियो टॉवर लगाया गया. अब यहां के ग्रामीण भी मोबाइल चला सकेंगे इंटरनेट का इस्तेमाल कर जानकारी एवं अन्य काम कर पाएंगे। बड़े शहरों के युवाओं की तरह सलातोंग और बेदरे के युवा भी बेहतर पढ़ाई के लिए मोबाईल से शिक्षा हासिल कर सकेंगे। अतिसंवेदनशील माना जाने वाले इस इलाक़े के ग्रामीण अब अत्याधुनुनिक युग से जुड़ेंगे।