विजयादशमी पर आरएसएस ने किया शस्त्र पूजन।

दंतेवाड़ा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ साल में 6 उत्सव मनाता है। विजयादशमी उसमें से एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत, अंधकार पर प्रकाश की विजय का द्योतक है। संघ पर संक्षिप्त परिचय देते खण्ड संघ चालक श्री महापात्र ने उक्त बातें कही। विजयादशमी के दिन ही डॉ० केशवराव बलिराम हेडगवार ने 1925 में नागपुर में संघ की आधारशीला रखी थी। विजयादशमी पर शक्तिरूपा दुर्गा, काली की पूजा के साथ शस्त्र पूजा की परंपरा हिंदु धर्म में अनादि काल से रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भारतीय जनमानस की आत्मा हैं। भगवान राम ने आज ही के दिन असत्य पर सत्य की जीत हासिल किया था। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को आरएसएस ने जीवंत रखा है। उन्होने कहा कि मनुष्यत्व ही हिंदुत्व है, और हिन्दुत्व राष्ट्रीयत्व है। अहिंसा परमो धर्म के मार्ग पर हिन्दु समाज चलता है। लेकिन आवश्यकता पड़े तो शस्त्र उठाना भी हमारे धर्मग्रन्थों में उल्लेखित है। द्वापर व सतयुग में भी धर्म को बचाने देवताओं ने शस्त्र उठाया था। अंत में श्री महापात्र ने उपस्थित सभी स्वयंसेवकों को कहा कि खण्ड स्तरीय पथ संचलन का कार्यक्रम 8 अक्टूबर दिन शनिवार को रखा गया है जिसमें सभी स्वयं सेवकों को पूर्ण गणवेश के साथ उपस्थित होना अनिवार्य है। शस्त्र पूजन कार्यक्रम के दौरान संदीप जी (विभाग प्रचार प्रमुख दक्षिण बस्तर) अंकुर भदौरिया (नगर कार्यवाह) शुभम साहू (सह नगर कार्यवाह) वेणु गोपाल (जिला संपर्क प्रमुख) अनिश्च (खण्ड व्यवस्था प्रमुख)) लछिंदर नाग (खण्ड कार्यवाह) चंद्रकांत क्षत्रीय (विहिप कार्यकारी अध्यक्ष) संतोष सिंह चौहान (विहिप जिला मंत्री) चंदन साठवाने (विहिप कोषाध्यक्ष) रूपी वासुदेवा (नगर व्यवस्थापक प्रमुख) विजय साहू (नगर सेवा
प्रमुख) पंडित कुरसाम (जिला शारीरिक प्रमुख) शिशुपाल नेताम, मयंक यादव, उमाशंकर मिश्रा, श्रवड़ कड़ती, आदि स्वयं सेवक मौजूद।